Hindi (1)
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    बाबा साहेब अम्बेड्कर के महापरिनिर्वाण के बाद उनके अनुयायियो ने बहुत मेहनत से अम्बेड्करी विचारधारा का झंडा बुलंद किया और अधिकांश लोगो का फोकस समाज और सांस्कृतिक परिवर्तन रहा. सत्ताधारियो ने महत्वाकांक्षी लोगो को प्रलोभन देकर उनकी राजनितिक विरासत को जरूर कुंद किया लेकिन अम्बेड्करी मिशन की ताकत उसका विचार और सांस्कृतिक परिवर्तन का भाव ही रहा. श्री भगवान दास, एल आर बाली, सदानंद फुलझले, एन जी ऊके, के जमनादास उस दौर के उन लोगो मे थे जिन्होने बाबा साहेब के साथ काम किया और उनके मिशन को आगे ले जाने मे बेहद बडी भूमिका निभाई. राजा ढाले ने दलित पैंथर्स के जरिये, कुमुद पावडे ने अम्बेड्करी नारीवादी अंदोलन के जरिये और विजय सुरवाडे ने अपने ऐतिहासिक दस्तावेजीकरण के जरिए नई बातो को लोगो के सामने रखा और और अम्बेड्करी विचार धारा को बढाने मे बहुत महत्वपूर्ण कार्य किया. 80 के दशक मे वी टी राजशेखर ने दलित वायस के द्वारा बहुजन आंदोलन को एक बेहद मज़बूत धार दी. भदंत नागार्जुन सुरई ससई, जो जापान से आये लेकिन भारत मे ही बस गये, ने बौद्ध गया आंदोलन के लिये बहुत बडी लडाई लडी. ष्री मनोहर मौली विश्वास ने बंगाल मे अम्बेड्करी साहित्य को मज़बूत करने मे बहुत बडी भूमिका निभाई है. श्री धर्म कीर्ति जी ने आगरा मे ऐतिहासिक रामलीला मैदान मे बाबा साहेब को सुना और वहा बुद्ध विहार के उद्घाटन के अवसर भी मौजूद थे. आज के दौर मे अम्बेड्करी विचारधारा की दिशा के एक बेहद महत्वपूर्ण आलोचक है आनन्द तेलतुम्बडे जिनका विस्तृत साक्षात्कार भी इस पुस्तक मे है. हिंदी मे यह पहला वाल्युम है और उम्मीद है इसके बाद की कडिया भी नये लोगो के साथ आयेंगी. इस पुस्तक मे प्रस्तुत हर एक साक्षात्कार इतिहास का एक दस्तावेज है और अम्बेड्करी-बहुजन आंदोलन की दशा और दिशा को समझने मे मदद करेगा.

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