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    Vidya Bhushan Rawat

प्रेरणा केंद्र और मुशहरो का संघर्ष (अस्मिता के लिये)

by: Vidya Bhushan Rawat

यह पुस्तक विद्या भूषण रावत द्वारा देवरिया और कुशीनगर जनपद मे मुशहर समुदाय मे उनके द्वारा देखे गई घटनाओ का आंखो देखा विवरण है जो कुशीनगर मे भूख से हो रही मौतो के बारे मे मुशहर समाज के प्रश्नो को राष्टट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर उठाने के बाद से 1998-99 से शुरु हुई. उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदो विशेषकर चित्रकूट, फतेह्पुर, कानपुर देहात, गाजीपुर, सोनभद्र, लखीमपुर खीरी, मऊ, गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर मे भूमि और भूख के प्रश्नो को लेकर उन्होने न केवल स्वैच्छिक संगठनो के लोगो को अपने अधिकारॉ और कर्तव्यो की जानकारी और ट्रैनिंग दी अपितु उन्हे इन प्रश्नो को कानूनी तरीको से उठाने के तरीके भी बताये.

ये एक प्रकार से इस क्षेत्र में मुशहर समाज के संघर्षो का एक अच्छा दस्तावेज है और अन्य लोगो को प्रेरणा देगी. एक और मज़ेदार बात यह है

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A political commentator, human rights defender and a humanist. He has been engaged in public discourses on vital human rights issues particularly related to Caste Discrimination, Religious Intolerance, Untouchability and Minority Rights issues for the past 25 years. He has authored over 15 books and made an equal number of documentaries which are available on YouTube. He was awarded Ambedkar International Award 2016 for his services to strengthen the Ambedkarite movement in India by Ambedkar Association of North America. He was also awarded 'Distinguished Services to Humanism Award' 2011 by International Humanist and Ethical Union, London, at its conference in Oslo. A dissenter among dissenters. Wanderer & nature lover. A humanist with deep faith in social justice.
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About This Book
Overview

यह पुस्तक विद्या भूषण रावत द्वारा देवरिया और कुशीनगर जनपद मे मुशहर समुदाय मे उनके द्वारा देखे गई घटनाओ का आंखो देखा विवरण है जो कुशीनगर मे भूख से हो रही मौतो के बारे मे मुशहर समाज के प्रश्नो को राष्टट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर उठाने के बाद से 1998-99 से शुरु हुई. उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदो विशेषकर चित्रकूट, फतेह्पुर, कानपुर देहात, गाजीपुर, सोनभद्र, लखीमपुर खीरी, मऊ, गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर मे भूमि और भूख के प्रश्नो को लेकर उन्होने न केवल स्वैच्छिक संगठनो के लोगो को अपने अधिकारॉ और कर्तव्यो की जानकारी और ट्रैनिंग दी अपितु उन्हे इन प्रश्नो को कानूनी तरीको से उठाने के तरीके भी बताये.

ये एक प्रकार से इस क्षेत्र में मुशहर समाज के संघर्षो का एक अच्छा दस्तावेज है और अन्य लोगो को प्रेरणा देगी. एक और मज़ेदार बात यह है

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